मच्छरदानी पहुँचाने वाला स्वास्थ्य अभियान परिवार को मलेरिया से बचा सकता है, लेकिन उसी सप्ताह खेत में हुए छिड़काव के बाद सुरक्षित वापसी का सवाल अनुत्तरित रह सकता है। जब घरेलू स्वास्थ्य और खेती की सलाह अलग व्यवस्थाओं में चलती हैं, तो परिवार के सबसे जरूरी फैसले उनके बीच की खाली जगह में छूट जाते हैं।
यह दृश्य काल्पनिक है, लेकिन समस्या को ठोस रूप में समझाने के लिए कई संभावित अनुभवों को मिलाकर बनाया गया है। गुरुवार की सुबह, घाना के एक कोको उगाने वाले गाँव में अकुआ अपने आँगन में खड़ी थी। उसकी पीठ पर कपड़े से बँधा बच्चा सो रहा था और हाथ में स्वास्थ्य अभियान से मिली नई मच्छरदानी थी। स्वास्थ्यकर्मी ने परिवार के सोने की जगह पूछी, मच्छरदानी लगाने की बात समझाई और अगले घर की ओर बढ़ गया।
अकुआ के पति कोफी उसी समय खेत की चाबी और रबर के जूते खोज रहे थे। खेत में एक दिन पहले रसायन का छिड़काव हुआ था। उन्हें तय करना था कि आज अंदर जाकर गिरी हुई फलियाँ उठाना सुरक्षित है या नहीं।
किसी ने यह सवाल नहीं पूछा। किसी के पास इसका जवाब भी तैयार नहीं था।
एक ही परिवार, दो अलग जोखिम
घर के भीतर मलेरिया का जोखिम था। खेत में छिड़काव के बाद रसायन के संपर्क का जोखिम था। दोनों जोखिम उसी परिवार के थे, फिर भी उनसे निपटने वाली व्यवस्थाएँ एक-दूसरे से अनजान थीं।
स्वास्थ्यकर्मी का काम मच्छरदानी पहुँचाना था। खेत का फैसला शायद किसी कृषि विस्तार अधिकारी, प्रशिक्षित कृषि विशेषज्ञ या उत्पाद के सत्यापित निर्देशों से आना चाहिए था। अकुआ के लिए यह विभागों का प्रश्न नहीं था। उसके सामने सीधा सवाल था: “क्या हम आज खेत में जा सकते हैं?”
कोफी ने पड़ोसी से पूछा। पड़ोसी ने कहा कि वह छिड़काव के अगले दिन अपने खेत में चला जाता है। यह परिचित जवाब था, सत्यापित जवाब नहीं। बोतल का लेबल उनके लिए उपयोगी भाषा में समझना कठिन था। जिस व्यक्ति ने छिड़काव किया था, उससे तुरंत संपर्क नहीं हो पाया।
अब खराब अंत साफ दिखाई दे रहा था। अगर वे खेत में जाते, तो परिवार असुरक्षित संपर्क में आ सकता था। अगर नहीं जाते, तो उस दिन का जरूरी काम रुकता और तैयार उपज खराब होने का डर बना रहता।
मच्छरदानी खाट के पास रखी थी। खेत का सवाल वहीं का वहीं था।
जानकारी पहुँचना और सही फैसला कराना अलग बातें हैं
किसी राष्ट्रीय अभियान की ताकत उसकी पहुँच होती है। वह घर तक आता है, किसी जरूरी जोखिम को नाम देता है और परिवार को उससे बचने का साधन देता है। मगर पहुँच अपने आप संदर्भ नहीं बनाती।
कोको किसान का स्वास्थ्य खेत के दरवाजे पर खत्म नहीं होता। छिड़काव की मात्रा, दोबारा खेत में प्रवेश का समय और कटाई से पहले प्रतीक्षा की अवधि सीधे शरीर, भोजन और आय से जुड़ी बातें हैं। इनमें अनुमान के लिए जगह नहीं होनी चाहिए।
यहीं स्थानीय भाषा की भूमिका सामने आती है। किसान को लंबा दस्तावेज नहीं चाहिए। उसे उस क्षण एक छोटा, बोलकर पूछा जा सकने वाला प्रश्न चाहिए, और उत्तर ऐसा होना चाहिए जो पहले से कृषि विशेषज्ञ द्वारा जाँची गई सामग्री से आए। जानकारी अधूरी हो, रसायन स्पष्ट न हो या सुरक्षित अंतराल सत्यापित न हो, तो व्यवस्था को आत्मविश्वास से उत्तर गढ़ने के बजाय किसी जिम्मेदार व्यक्ति तक सवाल पहुँचाना चाहिए।
Neuralis का AgriVoice इसी दिशा में तैयार किया जा रहा है: असांते ट्वि में किसान की आवाज सुनना, केवल समीक्षा किए गए उत्तरों में से उपयुक्त सामग्री चुनना, जवाब सुनाना और अनिश्चित प्रश्न को किसी व्यक्ति तक पहुँचाना। अभी इसे सार्वजनिक स्तर पर तैयार सेवा मानना जल्दबाजी होगी। किसान पायलट से पहले अनुवाद, घाना के कृषि विशेषज्ञ की मंजूरी, वास्तविक किसान आवाज पर जाँच और जवाबदेह विस्तार अधिकारी जैसी शर्तें पूरी होना जरूरी हैं।
रसायन से जुड़े तीन उत्तर रोककर रखना इसी सावधानी का हिस्सा है। उनमें मात्रा, खेत में दोबारा प्रवेश और कटाई से पहले के अंतराल की पुष्टि बाकी है। ऐसे सवाल पर चुप रहना असुविधाजनक है, फिर भी गलत निर्देश देने से सुरक्षित है। यही तनाव कोफी के अनुत्तरित कीटनाशक प्रश्न में भी दिखाई देता है।
प्रणालियों के बीच एक स्पष्ट जोड़ चाहिए
अकुआ की कहानी में मोड़ तब आता है जब गाँव का कृषि संपर्क व्यक्ति उसी शाम लौटकर उत्पाद की सही पहचान करता है और सत्यापित निर्देश देखकर बताता है कि परिवार को क्या करना चाहिए। यह उत्तर समय रहते आया, लेकिन संयोग पर निर्भर था।
अगली सुबह कोफी खेत की मेड़ पर अनुमान लगाते हुए नहीं खड़े थे। उन्हें मालूम था कि कब प्रवेश करना है, क्या सुरक्षा बरतनी है और अगला सवाल किससे पूछना है। अकुआ ने मच्छरदानी बाँध दी थी। पहली बार उस सप्ताह घर और खेत के दोनों जोखिमों के लिए स्पष्ट अगला कदम मौजूद था।
यही वह जोड़ है जिसे संस्थानों को बनाना होगा। स्वास्थ्य अभियान को कृषि सलाह देने की जिम्मेदारी उठाने की जरूरत नहीं है। वह परिवार को स्थानीय भाषा वाले सत्यापित कृषि चैनल तक पहुँचा सकता है। कृषि कार्यक्रम भी स्वास्थ्य व्यवस्था की नकल किए बिना घरेलू जोखिमों को पहचानकर सही सेवा की ओर भेज सकता है।
व्यावहारिक शुरुआत छोटी हो सकती है: हर अभियान यह दर्ज करे कि परिवार किन दूसरे जोखिमों पर तत्काल निर्णय ले रहा है; हर कृषि उत्तर का स्वामी तय हो; रसायन संबंधी सामग्री पर विशेषज्ञ की मंजूरी हो; और अनिश्चित सवाल के लिए नामित व्यक्ति तथा जवाब देने की समय-सीमा हो।
अकुआ के घर में दो व्यवस्थाएँ पहुँची थीं। सुरक्षा तब पूरी हुई जब उनके बीच इंसानी जिम्मेदारी का रास्ता बना।
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